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mahabharat 4.14.d8: तुम मुझे नहीं जानते, इसीलिए काम-वासना में बहकी-बहकी बातें कर रहे हो। लेकिन असमर्थ मनुष्य चाहे कितना भी प्रयत्न कर ले, वह पर्वत को पार नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.14.d8 
यो मामज्ञाय कामार्त: अबद्धानि प्रभाषसे।
अशक्तस्तु पुमाञ्छैलं न लङ्घयितुमर्हति॥
 
 
अनुवाद
तुम मुझे नहीं जानते, इसीलिए काम-वासना में बहकी-बहकी बातें कर रहे हो। लेकिन असमर्थ मनुष्य चाहे कितना भी प्रयत्न कर ले, वह पर्वत को पार नहीं कर सकता।
 
You do not know me, that is why you are talking nonsense in lust. But no matter how much an incapable man tries, he cannot cross the mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)