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mahabharat 4.14.d7: मैं तुम्हारे लिए अत्यंत दुर्लभ हूँ क्योंकि मैं वीर गंधर्वों द्वारा रक्षित हूँ। यदि तुम मेरा अपमान करोगे तो शीघ्र ही उसी प्रकार गिर जाओगे जैसे ताड़का वृक्ष का फल जड़ से टूटकर गिर जाता है।   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  4.14.d7 
दुर्लभामभिमन्वानो मां वीरैरभिरक्षिताम्।
पतिष्यस्यवशस्तूर्णं वृन्तात् तालफलं यथा॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हारे लिए अत्यंत दुर्लभ हूँ क्योंकि मैं वीर गंधर्वों द्वारा रक्षित हूँ। यदि तुम मेरा अपमान करोगे तो शीघ्र ही उसी प्रकार गिर जाओगे जैसे ताड़का वृक्ष का फल जड़ से टूटकर गिर जाता है।
 
I am very rare for you as I am protected by the brave Gandharvas. If you insult me, you will soon be forced to fall like the fruit of the Tadka tree falls down from its root.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)