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mahabharat 4.14.d11: तुम्हारी सारी बातें व्यर्थ होंगी। तुम्हारे लिए मुझे पाना उतना ही असंभव है जितना किसी विशाल पर्वत को तराजू पर तौलना। जैसे कोई अधीर व्यक्ति गर्मी की दोपहर में, जब विशाल जंगल में भीषण गर्मी पड़ रही हो, किसी विशाल जंगल में प्रवेश करता है, वैसे ही तुम भी वहाँ केवल अपना और अपने पूरे परिवार का नाश करने के लिए ही प्रवेश करना चाहते हो।   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.14.d11 
मोघं तवेदं वचनं भविष्यति
प्रतोलनं वा तुलया महागिरे:।
हुताशनं प्रज्वलितं महावने
निदाघमध्याह्न इवातुर: स्वयम्॥
प्रवेष्टुकामोऽसि वधाय चात्मन:
कुलस्य सर्वस्य विनाशनाय च।
 
 
अनुवाद
तुम्हारी सारी बातें व्यर्थ होंगी। तुम्हारे लिए मुझे पाना उतना ही असंभव है जितना किसी विशाल पर्वत को तराजू पर तौलना। जैसे कोई अधीर व्यक्ति गर्मी की दोपहर में, जब विशाल जंगल में भीषण गर्मी पड़ रही हो, किसी विशाल जंगल में प्रवेश करता है, वैसे ही तुम भी वहाँ केवल अपना और अपने पूरे परिवार का नाश करने के लिए ही प्रवेश करना चाहते हो।
 
All your talks will be futile. For you, getting me is as impossible as weighing a huge mountain on a scale. Like an impatient man who enters a huge forest in the summer afternoon when a huge forest is raging, you also want to enter there only to destroy yourself and your entire family.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)