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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना
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श्लोक 46
श्लोक
4.14.46
एवमुक्ता तु सा साध्वी कीचकेनाशुभं वच:।
कीचकं प्रत्युवाचेदं गर्हयन्त्यस्य तद् वच:॥ ४६॥
अनुवाद
जब कीचक ने ऐसे अशुभ (पापपूर्ण) वचन कहे, तब पतिव्रता और पतिव्रता द्रौपदी ने उसके नीच वचनों की निन्दा की और इस प्रकार उत्तर दिया।
When Keechak uttered such inauspicious (sinful) words, the chaste and virtuous Draupadi condemned his lowly words and replied thus.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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