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mahabharat 4.14.45: शुभन्ने! मैंने यह सम्पूर्ण राज्य तुम्हें अर्पित कर दिया है। अब तुम इसके स्वामी हो। वररोहे! मुझे स्वीकार करो और मेरे साथ उत्तम सुख भोगो।॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.14.45 
मया दत्तमिदं राज्यं स्वामिन्यसि शुभानने।
भजस्व मां वरारोहे भुङ्क्ष्व भोगाननुत्तमान्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
शुभन्ने! मैंने यह सम्पूर्ण राज्य तुम्हें अर्पित कर दिया है। अब तुम इसके स्वामी हो। वररोहे! मुझे स्वीकार करो और मेरे साथ उत्तम सुख भोगो।॥ 45॥
 
Shubhanne! I have offered this entire kingdom to you. Now you are its owner. Vararohe! Accept me and enjoy the best pleasures with me.'॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)