Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.14.36: किसी भी प्रकार से दूसरे की स्त्री के प्रति कभी आकर्षित नहीं होना चाहिए। श्रेष्ठ पुरुषों का व्रत यही है कि जो अनुचित कर्म नहीं करने चाहिए, उन्हें सर्वथा त्याग दें ॥36॥ | mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परदारे न ते बुद्धिर्जातु कार्या कथंचन।
विवर्जनं ह्यकार्याणामेतत् सुपुरुषव्रतम्॥ ३६॥
अनुवाद
किसी भी प्रकार से दूसरे की स्त्री के प्रति कभी आकर्षित नहीं होना चाहिए। श्रेष्ठ पुरुषों का व्रत यही है कि जो अनुचित कर्म नहीं करने चाहिए, उन्हें सर्वथा त्याग दें ॥36॥
You should never get attracted to another's wife in any way. The vow of the best men is to completely abandon those inappropriate deeds that should not be done. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥