Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.14.34: द्रौपदी बोली, "सारथीपुत्र, तुम मुझे चाहते हो। तुम्हें शर्म आनी चाहिए। इस तरह मुझसे पूछना तुम्हारे लिए उचित नहीं है। पहली बात तो यह कि मैं नीच जाति की हूँ और दूसरी बात यह कि मैं एक दासी हूँ, एक भद्दी वेश-भूषा वाली स्त्री हूँ और एक नीच दासी हूँ जो बालों में कंघी करने का काम करती है।" | mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपदी बोली, "सारथीपुत्र, तुम मुझे चाहते हो। तुम्हें शर्म आनी चाहिए। इस तरह मुझसे पूछना तुम्हारे लिए उचित नहीं है। पहली बात तो यह कि मैं नीच जाति की हूँ और दूसरी बात यह कि मैं एक दासी हूँ, एक भद्दी वेश-भूषा वाली स्त्री हूँ और एक नीच दासी हूँ जो बालों में कंघी करने का काम करती है।"
Draupadi said, "Son of a charioteer, you want me. Shame on you. It is not worthy of you to ask me in this manner. Firstly, I belong to a low caste and secondly, I am a maid, a woman with a hideous dress and a lowly maid who does the work of combing hair."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥