Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.14.33: 'चारुहासिनी! यदि तुम चाहो तो मैं प्रथम स्त्रियों को त्याग दूँ, अन्यथा वे सब तुम्हारी दासी बनकर रहेंगी। सुन्दरी! सुमुखी! मैं स्वयं सदैव दासी बनकर तुम्हारे अधीन रहूँगा। 33॥ | mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्यजामि दारान् मम ये पुरातना
भवन्तु दास्यस्तव चारुहासिनि।
अहं च ते सुन्दरि दासवत् स्थित:
सदा भविष्ये वशगो वरानने॥ ३३॥
अनुवाद
'चारुहासिनी! यदि तुम चाहो तो मैं प्रथम स्त्रियों को त्याग दूँ, अन्यथा वे सब तुम्हारी दासी बनकर रहेंगी। सुन्दरी! सुमुखी! मैं स्वयं सदैव दासी बनकर तुम्हारे अधीन रहूँगा। 33॥
‘Charuhasini! If you want, I will abandon the first women or they will all remain as your slaves. Beautiful! Sumukhi! I myself will always remain under you like a slave. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥