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mahabharat 4.14.30: जिस प्रकार आप विभिन्न प्रकार के पेयों को पीने में आनन्द पाते हैं, जो अमृत के समान स्वादिष्ट और आनन्ददायक हैं, उसी प्रकार आप भी आनन्द लें।' 30.   |   mahabharat अध्याय 4.14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.14.30 
स्वादून्यमृतकल्पानि पेयानि विविधानि च।
पिबमाना मनोज्ञानि रममाणा यथासुखम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार आप विभिन्न प्रकार के पेयों को पीने में आनन्द पाते हैं, जो अमृत के समान स्वादिष्ट और आनन्ददायक हैं, उसी प्रकार आप भी आनन्द लें।' 30.
 
Enjoy yourself in the way you find pleasure in drinking various kinds of drinks that are as tasty and delightful as nectar.' 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)