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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 14: कीचकका द्रौपदीपर आसक्त हो उससे प्रणययाचना करना और द्रौपदीका उसे फटकारना
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श्लोक 21
श्लोक
4.14.21
कुड्मलाम्बुरुहाकारौ तव सुभ्रु पयोधरौ।
कामप्रतोदाविव मां तुदतश्चारुहासिनि॥ २१॥
अनुवाद
हे सुन्दर भौंहों और मनमोहक मुस्कान वाली सुन्दरी! आपके कमल के समान स्तन मुझे कामदेव के चाबुक की तरह पीड़ा दे रहे हैं।
O beautiful lady with lovely eyebrows and a charming smile! Your breasts shaped like lotus buds are tormenting me like the whip of Kamadeva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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