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श्लोक 4.12.d1-d2  |
(मातलिरिव देवपतेर्दशरथनृपते: सुमन्त्र इव यन्ता।
सुमह इव जामदग्नेस्तथैव तव शिक्षयाम्यश्वान्॥
युधिष्ठिरस्य राजेन्द्र नरराजस्य शासनात्।
शतसाहस्रकोटीनामश्वानामस्मि रक्षिता॥ ) |
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| अनुवाद |
| जैसे देवराज इन्द्र का सारथि मातलि है, राजा दशरथ का सारथि सुमन्तराम है और जमदग्निपुत्र परशुराम का सारथि है, उसी प्रकार मैं आपका सारथि बनकर आपके घोड़ों को प्रशिक्षित करूँगा। राजन! महाराज युधिष्ठिर के यहाँ उनकी आज्ञा से मैं लाखों घोड़ों का रक्षक रहा हूँ। |
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| Just as Devraj Indra's charioteer is Matali, King Dasharath's charioteer is Sumantram and Jamdagni's son is Parashurama's charioteer, similarly I will be your charioteer and will train your horses. King! I have been the custodian of lakhs of horses at Maharaj Yudhishthir's place on his orders. |
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