Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.98.16-17: लोमश कहते हैं - युधिष्ठिर! तब राजा ने उन्हें अपनी आय-व्यय का पूरा विवरण देकर कहा - 'यह समझकर जो कुछ धन शेष रह जाए, उसे आप लोग ले लीजिए।' संतुलित बुद्धि वाले महर्षि अगस्त्य ने वहाँ भी आय-व्यय का लेखा-जोखा देखकर यह मान लिया कि यदि इसमें से धन ले लिया जाए, तो अन्य प्राणियों को बहुत कष्ट उठाना पड़ सकता है॥ 16-17॥ | mahabharat अध्याय 3.98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोमश कहते हैं - युधिष्ठिर! तब राजा ने उन्हें अपनी आय-व्यय का पूरा विवरण देकर कहा - 'यह समझकर जो कुछ धन शेष रह जाए, उसे आप लोग ले लीजिए।' संतुलित बुद्धि वाले महर्षि अगस्त्य ने वहाँ भी आय-व्यय का लेखा-जोखा देखकर यह मान लिया कि यदि इसमें से धन ले लिया जाए, तो अन्य प्राणियों को बहुत कष्ट उठाना पड़ सकता है॥ 16-17॥
Lomasha says - Yudhishthira! Then the king gave them the full details of his income and expenditure and said - 'After understanding this, you all may take whatever money is left.' Maharishi Agastya, who had a balanced mind, after seeing the account of income and expenditure there also, believed that if money is taken from it, then other creatures may have to suffer a lot.॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥