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mahabharat 3.98.15: अगस्त्य बोले - हे पृथ्वी के स्वामी! आपको यह तो मालूम होना चाहिए कि हम लोग धन की खोज में यहाँ आए हैं। अन्य प्राणियों को कष्ट न पहुँचाते हुए, अपनी सामर्थ्यानुसार हमें अपने धन का कुछ भाग देने की कृपा करें॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 3.98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 98: धन प्राप्त करनेके लिये अगस्त्यका श्रुतर्वा, ब्रध्नश्व और त्रसदस्यु आदिके पास जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.98.15 
अगस्त्य उवाच
वित्तकामानिह प्राप्तान् विद्धि न: पृथिवीपते।
यथाशक्त्यविहिंस्यान्यान् संविभागं प्रयच्छ न:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अगस्त्य बोले - हे पृथ्वी के स्वामी! आपको यह तो मालूम होना चाहिए कि हम लोग धन की खोज में यहाँ आए हैं। अन्य प्राणियों को कष्ट न पहुँचाते हुए, अपनी सामर्थ्यानुसार हमें अपने धन का कुछ भाग देने की कृपा करें॥ 15॥
 
Agastya said - O lord of the earth! You should know that we have come here in search of wealth. Without hurting other creatures, please give us some part of your wealth as per your capability.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)