अन्यथा मैं इस जीर्ण-शीर्ण गेरुआ वस्त्र को धारण करके आपके साथ समागम नहीं करूँगा। हे ब्रह्मर्षि! तपस्वियों का यह पवित्र आभूषण किसी भी प्रकार के समागम आदि से अपवित्र नहीं होना चाहिए।॥19॥
‘Otherwise I will not have intercourse with you wearing this worn-out saffron garment. O Brahmarshi! This sacred ornament of ascetics should not be defiled by any kind of intercourse etc.'॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥