Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.95.8-9h: अतुलनीय तेजस्वी जनमेजय! पाण्डव प्रयाग से चलकर गया तीर्थ गए, जिसे पुण्यात्मा एवं धर्मात्मा गय ऋषि ने यज्ञ करके उत्तम पर्वत से पवित्र किया था। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 95: पाण्डवोंका नैमिषारण्य आदि तीर्थोंमें जाकर प्रयाग तथा गयातीर्थमें जाना और गय राजाके महान् यज्ञोंकी महिमा सुनना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  3.95.8-9h 
ततो महीधरं जग्मुर्धर्मज्ञेनाभिसंस्कृतम्॥ ८॥
राजर्षिणा पुण्यकृता गयेनानुपमद्युते।
 
 
अनुवाद
अतुलनीय तेजस्वी जनमेजय! पाण्डव प्रयाग से चलकर गया तीर्थ गए, जिसे पुण्यात्मा एवं धर्मात्मा गय ऋषि ने यज्ञ करके उत्तम पर्वत से पवित्र किया था। 8 1/2॥
 
Incomparable Tejaswi Janamejaya! Starting from Prayag, the Pandavas went to Gaya Tirtha, which was purified from the Uttam mountain by performing a yagya by the virtuous and religious sage Gaya. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)