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mahabharat 3.92.26: अम्बिकानन्दन राजा धृतराष्ट्र ने धर्मराज युधिष्ठिर के प्रति स्नेहवश उन सबको विधिपूर्वक अपना लिया और धन देकर संतुष्ट किया॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.92.26 
तान् सर्वान् धर्मराजस्य प्रेम्णा राजाम्बिकासुत:।
प्रतिजग्राह विधिवद् धनैश्च समतर्पयत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अम्बिकानन्दन राजा धृतराष्ट्र ने धर्मराज युधिष्ठिर के प्रति स्नेहवश उन सबको विधिपूर्वक अपना लिया और धन देकर संतुष्ट किया॥ 26॥
 
Ambikanandanan Raja Dhritarashtra, out of affection for Dharmaraja Yudhishthira, adopted them all lawfully and satisfied them by giving them wealth.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)