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mahabharat 3.92.20: जो ब्राह्मण मिष्ठान्न खाते हैं, वे भी लौट जाएँ। जो लोग पका हुआ भोजन, चटनी, पेय पदार्थ और मांस आदि खाते हैं, वे भी लौट जाएँ।   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.92.20 
ते सर्वे विनिवर्तन्तां ये च मिष्टभुजो द्विजा:।
पक्वान्नलेह्यपानानां मांसानां च विकल्पका:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण मिष्ठान्न खाते हैं, वे भी लौट जाएँ। जो लोग पका हुआ भोजन, चटनी, पेय पदार्थ और मांस आदि खाते हैं, वे भी लौट जाएँ।
 
Those Brahmins who eat sweets should also go back. Those who eat cooked food, chutney, beverages and meat etc. should also go back.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)