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mahabharat 3.92.19: युधिष्ठिर बोले: जो ब्राह्मण और तपस्वी भिक्षाटन करते हैं और जो भूख, प्यास, परिश्रम, थकान और शीत की पीड़ा सहन नहीं कर सकते, उन्हें लौट जाना चाहिए॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.92.19 
युधिष्ठिर उवाच
भिक्षाभुजो निवर्तन्तां ब्राह्मणा यतयश्च ये।
क्षुत्तृडध्वश्रमायासशीतार्तिमसहिष्णव:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले: जो ब्राह्मण और तपस्वी भिक्षाटन करते हैं और जो भूख, प्यास, परिश्रम, थकान और शीत की पीड़ा सहन नहीं कर सकते, उन्हें लौट जाना चाहिए॥19॥
 
Yudhishthira said: Those brahmins and ascetics who eat alms and who cannot bear the pain of hunger, thirst, toil and fatigue and cold should go back.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)