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mahabharat 3.92.15: जो आपके साथ है, जिसका अर्जुन जैसा भाई है और जिसका स्मरण इन्द्र करता है, उससे अधिक भाग्यशाली कौन है? ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.92.15 
भवता संगमो यस्य भ्राता चैव धनंजय:।
वासव: स्मरते यस्य को नामाभ्यधिकस्तत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो आपके साथ है, जिसका अर्जुन जैसा भाई है और जिसका स्मरण इन्द्र करता है, उससे अधिक भाग्यशाली कौन है? ॥15॥
 
Who is more fortunate than the one who is in your company, who has a brother like Arjuna, and who is remembered by Indra? ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)