Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.92.14: युधिष्ठिर बोले, 'महर्षि! आपको देखकर और आपके वचन सुनकर मुझे इतनी प्रसन्नता हुई है कि मैं इन वचनों का कोई उत्तर नहीं सोच सकता। इस संसार में देवराज इन्द्र जिसका स्मरण करते हैं, उससे श्रेष्ठ कौन है?' | mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
न हर्षात् सम्प्रपश्यामि वाक्यस्यास्योत्तरं क्वचित्।
स्मरेद्धि देवराजो यं को नामाभ्यधिकस्तत:॥ १४॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, 'महर्षि! आपको देखकर और आपके वचन सुनकर मुझे इतनी प्रसन्नता हुई है कि मैं इन वचनों का कोई उत्तर नहीं सोच सकता। इस संसार में देवराज इन्द्र जिसका स्मरण करते हैं, उससे श्रेष्ठ कौन है?'
Yudhishthira said, 'Maharshi! I am so happy to see you and hear your words that I cannot think of any reply to these words. Who is better in this world than the one whom Devraj Indra remembers?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥