नानृजुर्नाकृतात्मा च नाविद्यो न च पापकृत्।
स्नाति तीर्थेषु कौरव्य न च वक्रमतिर्नर:॥ ११॥
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! जो मनुष्य सरल नहीं है, जिसने अपने मन और इन्द्रियों को वश में नहीं किया है, जो ज्ञान से अज्ञानी और पापात्मा है तथा जिसकी बुद्धि छल-कपट से भरी हुई है, ऐसा मनुष्य (श्रद्धा के अभाव के कारण) तीर्थों में स्नान नहीं करता॥11॥
O son of Kuru! A person who is not simple, who has not controlled his mind and senses, who is ignorant of knowledge and sinful soul and whose intellect is filled with deceit, such a person (due to lack of faith) does not take bath in holy places. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥