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mahabharat 3.92.10: महाराज युधिष्ठिर! यह तीर्थ सब प्रकार के भय का नाश करने वाला है। मनु आदि पुण्यात्मा ऋषियों ने इसी तीर्थ धर्म का पालन किया है। 10॥   |   mahabharat अध्याय 3.92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 92: महर्षि लोमशके मुखसे इन्द्र और अर्जुनका संदेश सुनकर युधिष्ठिरका प्रसन्न होना और तीर्थयात्राके लिये उद्यत हो अपने अधिक साथियोंको विदा करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.92.10 
इयं राजर्षिभिर्याता पुण्यकृद्भिर्युधिष्ठिर।
मन्वादिभिर्महाराज तीर्थयात्रा भयापहा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! यह तीर्थ सब प्रकार के भय का नाश करने वाला है। मनु आदि पुण्यात्मा ऋषियों ने इसी तीर्थ धर्म का पालन किया है। 10॥
 
Maharaj Yudhishthir! This pilgrimage is going to destroy all kinds of fear. The virtuous sages like Manu etc. have followed this religion of pilgrimage. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)