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mahabharat 3.90.29: वे बदरिकाश्रम पुण्यक्षेत्र और परब्रह्म स्वरूप हैं। वे तीर्थस्थान हैं, वे पुण्यस्थान हैं, वे समस्त प्राणियों के परम ईश्वर हैं। 29॥   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.90.29 
तत् पुण्यं परमं ब्रह्म तत् तीर्थं तत् तपोवनम्।
तत् परं परमं देवं भूतानां परमेश्वरम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वे बदरिकाश्रम पुण्यक्षेत्र और परब्रह्म स्वरूप हैं। वे तीर्थस्थान हैं, वे पुण्यस्थान हैं, वे समस्त प्राणियों के परम ईश्वर हैं। 29॥
 
He is the embodiment of Badarikaashram Punyakshetra and Parabrahma Swarup. He is the place of pilgrimage, He is the sacred place, He is the supreme God of all beings. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)