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mahabharat 3.90.19: जब महात्मा जमदग्नि यज्ञ के माध्यम से देवताओं की पूजा कर रहे थे, तब नदियाँ उनके यज्ञ में आईं और ब्राह्मणों को शहद से तृप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.90.19 
यजमानस्य वै देवाञ्जमदग्नेर्महात्मन:।
आगम्य सरितो विप्रान् मधुना समतर्पयन्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब महात्मा जमदग्नि यज्ञ के माध्यम से देवताओं की पूजा कर रहे थे, तब नदियाँ उनके यज्ञ में आईं और ब्राह्मणों को शहद से तृप्त किया।
 
When the great soul Jamadagni was worshipping the gods through a yajna, rivers came to his yajna and satisfied the Brahmins with honey.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)