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mahabharat 3.90.10: कुन्तीनंदन! ऋषिगण सदैव सरस्वती नदी की पूजा करते आये हैं। महाराज! पूर्वकाल में बालखिल्य ऋषियों ने वहाँ यज्ञ किया था।   |   mahabharat अध्याय 3.90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 90: धौम्यद्वारा उत्तर दिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.90.10 
सरस्वती नदी सद्भि: सततं पार्थ पूजिता।
बालखिल्यैर्महाराज यत्रेष्टमृषिभि: पुरा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनंदन! ऋषिगण सदैव सरस्वती नदी की पूजा करते आये हैं। महाराज! पूर्वकाल में बालखिल्य ऋषियों ने वहाँ यज्ञ किया था।
 
Kunti Nandan! Sages have always worshipped the Saraswati river. Maharaj! In the past, the Balkhilya sages had performed a yajna there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)