Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.88.5-7: इस विषय में हमने सुना है कि महायोगी एवं यशस्वी मार्कण्डेयजी ने यजमान राजा नृग के समक्ष अपने वंश के योग्य यश की कथा इस प्रकार कही थी - 'पयोष्णी के तट पर उत्तम वराहतीर्थ में यज्ञ करने वाले राजा सोमपान करके इन्द्र नृग के यज्ञ में मग्न हो गए और प्रचुर दक्षिणा पाकर ब्राह्मण भी हर्ष से भर गए।' पयोष्णी का जल चाहे हाथ से उठाया गया हो। यदि वह पृथ्वी पर पड़ा हो अथवा वायु के वेग से अपने ऊपर उछलता हो, तो वह जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त किए हुए समस्त पापों को हर लेता है। 5-7॥ | mahabharat अध्याय 3.88: धौम्यमुनिके द्वारा दक्षिण दिशावर्ती तीर्थोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस विषय में हमने सुना है कि महायोगी एवं यशस्वी मार्कण्डेयजी ने यजमान राजा नृग के समक्ष अपने वंश के योग्य यश की कथा इस प्रकार कही थी - 'पयोष्णी के तट पर उत्तम वराहतीर्थ में यज्ञ करने वाले राजा सोमपान करके इन्द्र नृग के यज्ञ में मग्न हो गए और प्रचुर दक्षिणा पाकर ब्राह्मण भी हर्ष से भर गए।' पयोष्णी का जल चाहे हाथ से उठाया गया हो। यदि वह पृथ्वी पर पड़ा हो अथवा वायु के वेग से अपने ऊपर उछलता हो, तो वह जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त किए हुए समस्त पापों को हर लेता है। 5-7॥
In this matter, we have heard that the great yogi and the famous Markandeya had described the story of success worthy of his lineage in front of the host king Nrig in this way - 'The king who performed the yagya at Uttam Varahatirtha on the banks of Payoshni, became engrossed in Indra Nrig's yagya by drinking sompa and after receiving abundant Dakshina, the brahmins were also full of joy.' The water of Payoshni may have been picked up by hand. If it is lying on the earth or is bounced on itself by the force of the wind, it takes away all the sins committed from birth till death. 5-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥