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mahabharat 3.87.5: महाराज युधिष्ठिर, जहाँ तक मुझे स्मरण है, मैं पहले राजाओं द्वारा सेवा की जाने वाली सुन्दर पूर्व दिशा का वर्णन करूँगा।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.87: धौम्यद्वारा पूर्वदिशाके तीर्थोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 87: धौम्यद्वारा पूर्वदिशाके तीर्थोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.87.5 
पूर्वं प्राचीं दिशं राजन् राजर्षिगणसेविताम्।
रम्यां ते कथयिष्यामि युधिष्ठिर यथास्मृति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर, जहाँ तक मुझे स्मरण है, मैं पहले राजाओं द्वारा सेवा की जाने वाली सुन्दर पूर्व दिशा का वर्णन करूँगा।॥5॥
 
'Maharaja Yudhishthira, to the best of my memory I will first describe the beautiful eastern direction served by the kings.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)