vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 85: गंगासागर, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयाग आदि विभिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन और गंगाका माहात्म्य
»
श्लोक 14-15h
श्लोक
3.85.14-15h
अथ चम्पां समासाद्य भागीरथ्यां कृतोदक:॥ १४॥
दण्डाख्यमभिगम्यैव गोसहस्रफलं लभेत्।
अनुवाद
तत्पश्चात चम्पा जाकर भागीरथी की पूजा करें और दण्ड नामक तीर्थस्थान में जाकर हजार गोदान का फल प्राप्त करें। 14 1/2॥
After that, go to Champa and offer prayers to Bhagirathi and go to the pilgrimage place named Dand and get the fruit of thousand Godan. 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×