श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 91-92
 
 
श्लोक  3.83.91-92 
ततो गच्छेत राजेन्द्र मिश्रकं तीर्थमुत्तमम्।
तत्र तीर्थानि राजेन्द्र मिश्रितानि महात्मना॥ ९१॥
व्यासेन नृपशार्दूल द्विजार्थमिति न: श्रुतम्।
सर्वतीर्थेषु स स्नाति मिश्रके स्नाति यो नर:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! उसके बाद परम उत्तम मिश्रकतीर्थ में जाओ। महाराज! वहाँ महात्मा व्यास ने ब्राह्मणों के लिए समस्त तीर्थों को मिश्रित कर दिया है; ऐसा मैंने सुना है। जो मनुष्य मिश्रकतीर्थ में स्नान करता है, उसका स्नान समस्त तीर्थों में स्नान करने के बराबर होता है। ॥91-92॥
 
Rajendra! After that go to the most excellent Mishrakatirtha. Maharaj! There Mahatma Vyas has mixed all the pilgrimages for the Brahmins; I have heard this. The person who takes bath in Mishrakatirtha, his bath is equivalent to taking bath in all the pilgrimages. ॥91-92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)