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mahabharat 3.83.85: इसमें स्नान करके शूलपाणि भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य सब पापों से शुद्ध होकर परम गति को प्राप्त होता है ॥85॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  3.83.85 
तत्र स्नात्वार्चयित्वा च शूलपाणिं वृषध्वजम्।
सर्वपापविशुद्धात्मा गच्छेत परमां गतिम्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
इसमें स्नान करके शूलपाणि भगवान शंकर की पूजा करने से मनुष्य सब पापों से शुद्ध होकर परम गति को प्राप्त होता है ॥85॥
 
By taking bath in it and worshiping Shulpani Lord Shankar, a person gets purified from all sins and attains the supreme state. 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)