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mahabharat 3.83.60: हे मनुष्यों के स्वामी! वह तीर्थ केवल एक बार दर्शन करने से ही पवित्र हो जाता है। हे भारत! वहाँ केश धोने मात्र से ही मनुष्य पवित्र हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.83.60 
पुनाति गमनादेव दृष्टमेकं नराधिप।
केशानभ्युक्ष्य वै तस्मिन् पूतो भवति भारत॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! वह तीर्थ केवल एक बार दर्शन करने से ही पवित्र हो जाता है। हे भारत! वहाँ केश धोने मात्र से ही मनुष्य पवित्र हो जाता है।
 
O Lord of men! That pilgrimage purifies one just by visiting it or seeing it once. O Bharat! A man becomes pure just by washing his hair there. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)