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mahabharat 3.83.46: मन को वश में करके श्रीतीर्थ में जाकर स्नान करके देवताओं और पितरों का पूजन करके मनुष्य उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त करता है ॥46॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.83.46 
श्रीतीर्थं च समासाद्य स्नात्वा नियतमानस:।
अर्चयित्वा पितॄन् देवान् विन्दते श्रियमुत्तमाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
मन को वश में करके श्रीतीर्थ में जाकर स्नान करके देवताओं और पितरों का पूजन करके मनुष्य उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त करता है ॥46॥
 
By controlling the mind, going to Sritirtha, taking bath and worshiping the gods and ancestors, a person attains the best wealth. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)