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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन
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श्लोक 36
श्लोक
3.83.36
यच्च रोषाभिभूतेन क्षत्रमुत्सादितं त्वया।
ततश्च पापान्मुक्तस्त्वं पतितास्ते स्वकर्मभि:॥ ३६॥
अनुवाद
‘अब तुम क्रोधवश क्षत्रिय वंश की हत्या करने के पाप से मुक्त हो गए हो। वे क्षत्रिय अपने ही कर्मों के कारण मारे गए हैं।॥ 36॥
‘You have now been freed from the sin of killing the Kshatriya clan in a fit of rage. Those Kshatriyas have died because of their own deeds.॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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