श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 192
 
 
श्लोक  3.83.192 
संनिहत्यामुपस्पृश्य राहुग्रस्ते दिवाकरे।
अश्वमेधशतं तेन तत्रेष्टं शाश्वतं भवेत्॥ १९२॥
 
 
अनुवाद
सूर्यग्रहण के समय सन्निहति में स्नान करने से सौ अश्वमेध यज्ञों का वांछित एवं अनन्त फल प्राप्त होता है।192.
 
By taking a bath in Sannihati during a solar eclipse one gets the desired and eternal result of a hundred Ashwamedha sacrifices. 192.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)