श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  3.83.19-20h 
ततो जयन्त्यां राजेन्द्र सोमतीर्थं समाविशेत्॥ १९॥
स्नात्वा फलमवाप्नोति राजसूयस्य मानव:।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात जयन्ती के दिन सोमतीर्थ के निकट जाओ, वहाँ स्नान करने से राजसूय यज्ञ का फल मिलता है ॥19 1/2॥
 
Rajendra! Thereafter, on Jayanti, go near Somtirtha, by taking bath there, one gets the fruits of Rajasuya Yagya. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)