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mahabharat 3.83.185-186h: नरेश्वर! इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोमतीर्थ में स्नान करने से तीर्थ-सेवक मनुष्य सोमलोक को प्राप्त होता है । 185 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 185-186h
 
 
श्लोक  3.83.185-186h 
सोमतीर्थे नर: स्नात्वा तीर्थसेवी नराधिप॥ १८५॥
सोमलोकमवाप्नोति नरो नास्त्यत्र संशय:।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोमतीर्थ में स्नान करने से तीर्थ-सेवक मनुष्य सोमलोक को प्राप्त होता है । 185 1/2॥
 
Nareshwar! There is no doubt that by taking bath in Somatirtha, a pilgrim-serving person attains Somloka. 185 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)