Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.83.157-159h: धर्मात्मा! तत्पश्चात वहाँ से शतसहस्र और सहस्रका तीर्थों की यात्रा करो। ये दोनों ही प्रसिद्ध तीर्थ हैं। इनमें स्नान करने से मनुष्य को सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है। वहाँ किए गए दान या व्रत का महत्व अन्यत्र की अपेक्षा सहस्र गुना अधिक है। 157-158 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मात्मा! तत्पश्चात वहाँ से शतसहस्र और सहस्रका तीर्थों की यात्रा करो। ये दोनों ही प्रसिद्ध तीर्थ हैं। इनमें स्नान करने से मनुष्य को सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है। वहाँ किए गए दान या व्रत का महत्व अन्यत्र की अपेक्षा सहस्र गुना अधिक है। 157-158 1/2॥
Religious! Thereafter, from there, travel to Shatashasra and Sahasraka-tirthas. Both of them are famous pilgrimage places. By bathing in them, a person gets the result of thousand Godan. The importance of charity or fasting done there is a thousand times more than anywhere else. 157-158 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥