श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  3.83.137 
कपालमोचनं तीर्थं सर्वपापप्रमोचनम्।
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
कपालमोचनतीर्थ सब पापों से मुक्त करने वाला है ! हे पुरुषोत्तम ! वहाँ स्नान करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है ॥137॥
 
Kapalmochantirtha is the one who frees one from all sins! Male best! By taking bath there a person becomes free from all sins. 137॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)