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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन
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श्लोक 130
श्लोक
3.83.130
त्वत्प्रसादात् सुरा: सर्वे मोदन्तीहाकुतोभया:।
एवं स्तुत्वा महादेवमृषिर्वचनमब्रवीत्॥ १३०॥
अनुवाद
‘आपकी कृपा से यहाँ के सभी देवता निर्भय और प्रसन्न रहते हैं।’ इस प्रकार स्तुति करके ऋषि ने पुनः महादेवजी से कहा-॥130॥
'Due to your blessings all the gods here remain fearless and happy.' Having praised in this manner the sage again said to Mahadevji -॥ 130॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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