श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  3.83.11-12 
तत्र स्नात्वा च नत्वा च त्रिलोकप्रभवं हरिम्।
अश्वमेधमवाप्नोति विष्णुलोकं च गच्छति॥ ११॥
तत: पारिप्लवं गच्छेत् तीर्थं त्रैलोक्यविश्रुतम्।
अग्निष्टोमातिरात्राभ्यां फलं प्राप्नोति भारत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ स्नान करके त्रिलोक भवन भगवान श्रीहरि को प्रणाम करके मनुष्य अश्वमेध्य यज्ञ का फल प्राप्त करता है और भगवान विष्णु के लोक को जाता है। इसके बाद त्रिभुवन में परिप्लव नामक प्रसिद्ध तीर्थस्थान पर जाए। भारतवर्ष में वहाँ स्नान करने से अग्निष्टोम तथा अतित्रयज्ञों का फल प्राप्त होता है। 11-12॥
 
By taking bath there and paying obeisance to Trilok Bhavan Lord Sri Hari, a person gets the results of Ashwamedhya Yagya and goes to the world of Lord Vishnu. After this, go to the famous pilgrimage place named Pariplav in Tribhuvan. India By taking bath there, one gets the results of Agnisthoma and Atiratrayyagyas. 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)