श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.82.70 
शङ्कुकर्णेश्वरं देवमर्चयित्वा युधिष्ठिर।
अश्वमेधाद् दशगुणं प्रवदन्ति मनीषिण:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! वहाँ शंकुकर्णेश्वर शिव का पूजन करने से, बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि अश्वमेध पूजन से दस गुना पुण्य फल प्राप्त होता है ॥70॥
 
Yudhisthira! By worshiping Shankukarneshwar Shiva there, wise men say that by worshiping Ashvamedha, one will get ten times the virtuous results. 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)