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mahabharat 3.79.d1: राजन! जुए का रहस्य जानकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर भीमसेन आदि सहित मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  3.79.d1 
(प्रतिगृह्याक्षहृदयं कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
आसीद्‍धृष्टमना राजन् भीमसेनादिभिर्युत:॥
 
 
अनुवाद
राजन! जुए का रहस्य जानकर कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर भीमसेन आदि सहित मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए।
 
King! On knowing the secret of gambling, Kunti's son Yudhishthira along with Bhimasena etc. became very happy in their hearts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)