Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.79.5: उसने विधिपूर्वक अनेक प्रकार के यज्ञों द्वारा यथोचित दक्षिणा सहित भगवान् की पूजा की। राजेन्द्र! इसी प्रकार पुनः राज्य पाकर तुम शीघ्र ही अपने बन्धुओं के साथ यज्ञ का अनुष्ठान करोगे। 5॥ | mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ईजे च विविधैर्यज्ञैर्विधिवच्चाप्तदक्षिणै:।
तथा त्वमपि राजेन्द्र ससुहृद् यक्ष्यसेऽचिरात्॥ ५॥
अनुवाद
उसने विधिपूर्वक अनेक प्रकार के यज्ञों द्वारा यथोचित दक्षिणा सहित भगवान् की पूजा की। राजेन्द्र! इसी प्रकार पुनः राज्य पाकर तुम शीघ्र ही अपने बन्धुओं के साथ यज्ञ का अनुष्ठान करोगे। 5॥
He worshiped the Lord in a systematic way through various types of Yagyas with adequate Dakshina. Rajendra! Similarly, after getting your kingdom again, you will soon perform the Yagya rituals along with your friends. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥