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mahabharat 3.79.1: महर्षि बृहदश्व कहते हैं: युधिष्ठिर, जब नगर में शांति और प्रसन्नता छा गई तथा सर्वत्र बड़े-बड़े उत्सव होने लगे, उस समय राजा नल एक विशाल सेना लेकर विदर्भ से दमयन्ती को ले आए।   |   mahabharat अध्याय 3.79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 79: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.79.1 
बृहदश्व उवाच
प्रशान्ते तु पुरे हृष्टे सम्प्रवृत्ते महोत्सवे।
महत्या सेनया राजा दमयन्तीमुपानयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं: युधिष्ठिर, जब नगर में शांति और प्रसन्नता छा गई तथा सर्वत्र बड़े-बड़े उत्सव होने लगे, उस समय राजा नल एक विशाल सेना लेकर विदर्भ से दमयन्ती को ले आए।
 
Sage Brihadashwa says: Yudhishthira, when the city was filled with peace and happiness, and great festivities began everywhere, at that time King Nala went with a large army and brought Damayanti from Vidarbha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)