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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन
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श्लोक 47
श्लोक
3.76.47
तत: सर्वं यथावृत्तं दमयन्त्या नलस्य च।
भीमायाकथयत् प्रीत्या वैदर्भ्या जननी नृप॥ ४७॥
अनुवाद
'राजन् ! तत्पश्चात् (दमयन्ती से यह बात जानकर) दमयन्ती की माता ने अत्यन्त प्रसन्नतापूर्वक राजा भीम से नल-दमयन्ती का सम्पूर्ण वृत्तान्त कह सुनाया ॥47॥
'King! Thereafter (after knowing this from Damayanti) Damayanti's mother very happily narrated the entire story of Nal-Damayanti to King Bhima. 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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