vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन
»
श्लोक 40
श्लोक
3.76.40
तथा ब्रुवति वायौ तु पुष्पवृष्टि: पपात ह।
देवदुन्दुभयो नेदुर्ववौ च पवन: शिव:॥ ४०॥
अनुवाद
वायुदेव जब ऐसा कह रहे थे, तब आकाश से पुष्पवर्षा होने लगी, देवताओं के नगाड़े बजने लगे और मंगलमय वायु बहने लगी ॥40॥
While Vayudev was saying this, flowers started raining from the sky, the drums of the gods were sounding and an auspicious wind started blowing. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×