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उपायो विहितश्चायं त्वदर्थमतुलोऽनया।
न ह्येकाह्ना शतं गन्ता त्वामृतेऽन्य: पुमानिह॥ ३८॥
अनुवाद
'दमयंती ने आपको प्राप्त करने के लिए यह अतुलनीय उपाय किया था, क्योंकि इस संसार में आपके अतिरिक्त कोई दूसरा ऐसा पुरुष नहीं है जो एक दिन में सौ योजन (रथ द्वारा) यात्रा कर सके।
'To attain you Damayanti had devised this incomparable method, for in this world there is no other person except you who can travel a hundred yojanas (by chariot) in a day.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥