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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन
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श्लोक 37
श्लोक
3.76.37
राजञ्छीलनिधि: स्फीतो दमयन्त्या सुरक्षित:।
साक्षिणो रक्षिणश्चास्या वयं त्रीन् परिवत्सरान्॥ ३७॥
अनुवाद
'राजन्! दमयंती ने अपने चरित्र की उज्ज्वल निधि को सदैव सुरक्षित रखा है। हम तीन वर्षों से उसके रक्षक और साक्षी रहे हैं।
'King! Damayanti has always preserved the bright treasure of her character. We have been its protectors and witnesses for three years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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