Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.76.33: सूर्यदेव अपनी प्रचण्ड किरणों से सम्पूर्ण लोकों में विचरण करते हैं (अतः वे सबके शुभ-अशुभ कर्मों को भी देखते रहते हैं)। यदि मैंने कोई पाप किया हो तो वे मेरे प्राण ले लें॥33॥ | mahabharat अध्याय 3.76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा चरति तिग्मांशु: परेण भुवनं सदा।
स मुञ्चतु मम प्राणान् यदि पापं चराम्यहम्॥ ३३॥
अनुवाद
सूर्यदेव अपनी प्रचण्ड किरणों से सम्पूर्ण लोकों में विचरण करते हैं (अतः वे सबके शुभ-अशुभ कर्मों को भी देखते रहते हैं)। यदि मैंने कोई पाप किया हो तो वे मेरे प्राण ले लें॥33॥
The Sun God with his intense rays moves over all the worlds (so he also keeps watching everyone's good and bad deeds). If I have committed a sin then let him take away my life. ॥33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥