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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन
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श्लोक 15
श्लोक
3.76.15
दमयन्त्या ब्रुवन्त्यास्तु सर्वमेतदरिंदम।
शोकजं वारि नेत्राभ्यामसुखं प्रास्रवद् बहु॥ १५॥
अनुवाद
जब दमयन्ती यह सब कह रही थी, तब नल की आँखों से शोकजनित आँसुओं की अविरल धारा बह रही थी।
When Damayanti was saying all this, a continuous stream of sorrowful tears born of grief kept flowing from Nala's eyes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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